डिप्टी सीएम साहब…एसी लगवाने नहीं, कभी भ्रष्टाचार हटवाने भी आइए!

गोरखपुर : भारत में एक ऐसी “विमुक्त” जनजाति हुआ करती थी, जिसका पेशा ही “लूटपाट” था । अंग्रेजों ने 1871 के “क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट” के तहत उसे “अपराधी” जनजाति घोषित कर रखा था । उस “जनजाति” के बारे में कहा जाता है कि वे केवल “लूटते” ही नहीं थे…बल्कि जिसे लूटते थे…उसकी पहले जमकर “पिटाई” भी करते थे । कोई व्यक्ति हाथ जोड़कर कहता भी कि भाई लोगों…जो कुछ मेरे पास है सब ले लो…लेकिन मत मारो ! लेकिन तब भी वे मानते नहीं थे । उनका कहना था कि बिना मेहनत के एक पैसा छूना भी “हराम” है…इसलिए उनका “श्रम” था पीटना…और “आमदनी” थी लूटा हुआ “सामान” । ठीक ऐसा ही हाल “जिला अस्पताल गोरखपुर” का है । यहाँ के “लुटेरे” भी बड़े “स्वाभिमानी” हैं । बिना तीन पाँच किये एक रुपये का माल घोंटना भी इनके लिए “हराम” है ।

अभी कल गोरखपुर जिला अस्पताल में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक जी पधारे । उद्देश्य था…व्यवस्थाओं का “निरीक्षण” करना ! इमरजेंसी वार्ड में “उमस” मिली…मरीज पसीने से तर बतर मिले…तो साहब का दिल पसीज गया और उन्होंने तत्काल “एसी” लगाने का आदेश दे दिया । अब “एसी” तो लग जाएगा साहब… लेकिन यह बताईये कि 30 चालीस हजार वाला “एसी” आखिर कितने लाख रुपये में खरीदा जाएगा ? यह सवाल इसलिए क्योंकि यह कोई साधारण “जिला अस्पताल” नहीं है । यह वही “जिला अस्पताल” है… जहाँ 500 रुपये का “सैनिटाइज़र” लगभग 2100 रुपये में खरीदे गए हैं । ये वही जिला अस्पताल है जहाँ 20 पच्चीस हजार रुपये के “बेड” लाखों रुपये में खरीदे जाने को लेकर काफी चर्चा हुई है । जाँच भी बैठी…फाइलें भी बनीं…लेकिन “रिपोर्टें” आज तक “एडी” साहब के “रिटायरमेन्ट” का इंतजार कर रही है । डिप्टी सीएम साहब इमरजेंसी की “उमस” देखकर बेचैन हो गए । होना भी चाहिए था…लेकिन क्या उन्हें वह “घुटन” नहीं दिखाई दी जो वर्षों से पूरे अस्पताल में फैली हुई है ? वो “घुटन”..जो “कमीशनखोरी” के सबूतों और चर्चाओं से पैदा हुई है ! वो “घुटन”…जो खरीद में पारदर्शिता पर उठते सवालों से पैदा हुई है ! वो “घुटन”…जो मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों से पैदा हुई है !

कहने को यह अस्पताल डॉक्टरों का है डिप्टी सीएम साहब…लेकिन यहाँ चर्चा इलाज से ज्यादा “खरीद” की होती है ! कहने को यह अस्पताल मरीजों के लिए है…लेकिन चर्चा दवाइयों से ज्यादा “कमीशन” की होती है ! कहने को यह अस्पताल सेवा का “मंदिर” है…लेकिन यहाँ “रुई” से लेकर “सुई” तक की खरीद सवालों के घेरे में है । अगर इन सब मामलों में जाँच पूरी ही चुकी है…तो फिर उनकी रिपोर्टें सार्वजनिक क्यों नहीं हैं ? अगर आरोप गलत हैं…तो लुटेरों को “अभयदान” देकर “दोषमुक्त” कीजिए…और अगर आरोप सही हैं…तो कार्रवाई कीजिए ।

और डिप्टी साहब ये बताईये कि जिस डॉक्टर के खिलाफ वर्षों से तरह तरह के सबूतों सहित आरोप सार्वजनिक चर्चा का विषय रहे हों…जो “नियम कानून” को ठेंगा दिखाकर पिछले 26 सालों से यहीं जमा हो…जिनके “प्राइवेट प्रैक्टिस” के वीडियो वायरल हुए और जाँच खुली हो…जिनके “कदाचार” के संबंध में “लोकायुक्त” स्तर पर जाँच प्रचलित हो…जो डॉक्टर होते हुए भी एक “व्यापारी” की तरह “जिला अस्पताल” में “माल” खरीदने के धंधे से चिपक कर बैठा हो…उसी व्यक्ति से आप अस्पताल की व्यवस्था का हाल पूछ रहे हैं…! उसी से आप मरीजों की स्थिति पूछ रहे हैं…उसी को अपना “गाइड” बना कर आप जिला अस्पताल की परिक्रमा कर रहे हैं…तो फिर “जनता” उम्मीद किससे करे ?

क्या कभी ऐसा भी हुआ कि…आपने बिना किसी को बताए औचक निरीक्षण किया हो और…किसी मरीज के परिजन से यह पूछा हो कि…बताइए, यहाँ इलाज कैसा मिल रहा है ? क्या आपने कभी “दवा” की लाइन में लगे किसी बुजुर्ग से पूछा है कि बाहर की “दवा” लिखी गई या “अस्पताल” की ? क्या आपने किसी “प्रसूता” के परिजन से पूछा है कि…किसी ने “डिलीवरी” के पैसे तो नहीं माँगे ? क्या आपने कभी “इमरजेंसी” में आये किसी मरीज से यह पूछा है कि उससे “इलाज” के नाम पर अपने “खाते” में ही ढाई हजार रुपये ले लेने वाले पर आज तक क्या कार्यवाही हुई ? अगर नहीं पूछा…तो फिर ये कैसा “निरीक्षण” है साहब ?

सबसे बड़ा “व्यंग्य” तो यह है साहब कि जिन लोगों पर उपरोक्त गंभीर सवाल उठते रहे…वही लोग आपका “स्वागत” भी कर रहे थे…वही लोग “रेड कारपेट” भी बिछा रहे थे…वही फूलों का “गुलदस्ता” भी दे रहे थे…वही “अस्पताल” की उपलब्धियाँ भी गिना रहे थे…और वही आपको बता रहे थे कि “अस्पताल” में सब ठीक ठाक है । अब तो अपने “भ्रष्टाचार” पर “रिपोर्ट” भी वही लिखेंगे…अपने “भ्रष्टाचार” की जानकारी भी वही देंगे…और आप उसी “रिपोर्ट” पर भरोसा भी कर लेंगे ? ऐसे में “भ्रष्टाचार” खत्म होगा या फिर खुद को “सम्मानित” महसूस करेगा ?

जिला अस्पताल में “भ्रष्टाचार” के “राजसिहांसन” के सबसे “उच्च पायदान” पर पिछले कई सालों से “निर्विरोध” विराजित जिस डॉक्टर को 22 जुलाई को “लोकायुक्त” के समक्ष पेश होने का निर्देश जारी है…वो कल “उचक उचक” कर आपके संग “सेल्फी” ले रहे थे साहब ! अब ऐसा हुआ भी तो इसमें गलत क्या है ? क्योंकि इस वक्त “डॉक्टर साहब” पर “जाँचों” की बौछार कुछ इस कदर गिर रही है कि…एक बार इनसे “जमीन” पर बैठने के लिए कहिए तो ये ज़मीन पर “रेंगने” लग जाएंगे…और यदि “अभिवादन” करने को कह दीजिये तो “चरणपाश” होकर “लोटने” लग जायँगे !

ये बहुत अच्छा हुआ कि आपको अस्पताल में पानी भी दिखाई दे गया साहब…और आपने जवाब दिया कि “लो लैंड” है…इसलिए पानी भर जाता है ! तो फिर आप ही बताईये कि इस “लौ लैंड” पर जनता कौन सा “गोवर्धन” पर्वत लाकर रख दे कि…उसे इस “लो लैंड” की समस्या से “निजात” मिल जाये । क्योंकि पिछले बीस वर्षों से हर “बरसात” में जिला अस्पताल तो “तालाब” बन ही जाता है । गोरखपुर को “स्पेन” की उपाधि देने वाले भी तो आपके साथ ही थे । कम से कम उन्ही से पूछ लेते…कि हर बार “बरसात” आते ही “जिला अस्पताल” “बिहार” के किसी “दियारे” जैसा दिखाई क्यों देने लगता है ?

अगली बार जब आप आइए तो बिना किसी “सूचना” के आइए साहब…बिना किसी “VIP बत्ती” के आइए…बिना “कैमरों” के आइए…बिना “स्वागत” के आइए…बिना किसी “गाइड” के आइए…और किसी “वार्ड” में चुपचाप बैठकर मरीजों से पूछिए
कि “सच” बताइए…यहाँ क्या हो रहा है ? यकीन मानिए…कि
जो “रिपोर्ट” मरीज देगा…वह किसी भी “सीएमएस”…किसी भी “डॉक्टर”…किसी भी “अधिकारी” और किसी भी “स्वागत समिति” से ज्यादा “सच्ची” होगी ।

ये पोस्ट सिर्फ आपको जिला अस्पताल गोरखपुर की वास्तविकता से अवगत कराने के लिए है डिप्टी सीएम साहब…..क्योंकि यहाँ का “भ्रष्टाचार” आपकी नज़रों से “ओझल” है ! यदि ऐसी स्थिति में आपकी जानकारी भी उन्हीं लोगों पर निर्भर है…जिनके खिलाफ “भ्रष्टाचार” के “सबूत” मौजूद  हैं और जिनसे “सरकारी” धन की “वसूली” होनी चाहिए…तो फिर “सवाल” पूछने का अधिकार “जनता” रखती है कि…आपके ऐसे “दौरों” से बदलता क्या है ? ये माना कि आपके दौरे के बाद “एसी” लग जाएगा…”फोटो” भी आ जाएगी… “प्रेस नोट” भी छप जाएगा…”इमरजेंसी वार्ड” की हवा भी “ठंडी” हो जाएगी…लेकिन “भ्रष्टाचार” का “बुखार” तो फिर भी 104 डिग्री पर ही बना रहेगा ।

By systemkasach

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