जब सरकार “गलत” हो…तो सच बोलना “खतरनाक” हो जाता है ! (वाल्टेयर)

जब सरकार “गलत” हो तो आपका “सही” होना “खतरनाक” हो सकता है…। उद्धरण संग्रहों में इन पंक्तियों को “वाल्टेयर” के नाम से साझा किया जाता है । “वाल्टेयर” एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी दार्शनिक, लेखक, इतिहासकार और सामाजिक आलोचक थे । उनका मानना था कि यदि “सत्ता” न्यायपूर्ण हो…तो सही व्यक्ति “सुरक्षित” रहता है…और यदि “सत्ता” अन्यायपूर्ण हो…तो सत्य बोलना “जोखिम” भरा हो सकता है ! “वाल्टेयर” को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक सहिष्णुता, न्याय और निरंकुश सत्ता के विरोध का प्रबल “समर्थक” माना जाता है । अपनी तीखी आलोचनाओं के कारण उन्हें कई बार “जेल” भी जाना पड़ा । उनका यह “कथन” यह संदेश देता है कि यदि कोई “सरकार” अन्यायपूर्ण या दमनकारी हो, तो “सत्य” बोलने वाला, “भ्रष्टाचार” का विरोध करने वाला या “न्याय” की माँग करने वाला व्यक्ति ही सत्ता की नजर में “समस्या” बन सकता है । ऐसी परिस्थितियों में सही व्यक्ति को भी मुकदमों, गिरफ्तारी, उत्पीड़न, बदनाम करने या अन्य प्रकार के “दमन” का सामना करना पड़ता है ।

विश्वगुरु भारत की यह तस्वीर बहुत दूर तलक गयी है…!

जंतर मंतर पर चल रहा “प्रोटेस्ट” और “प्रोटेस्ट” के दौरान बरती गई “बर्बरता” भी यही बता रही हैं कि इंसान के “गिरने” की सम्भावनाएँ भरपूर है । इसलिए खूब “गिर” लीजिए… इतना गिर जाईये कि “गुरूत्वाकर्षण बल” भी “शर्म” के मारे खुद ही औंधे मुँह “गिर” पड़े । अरे ये वही “देश” है जहाँ “दुःशासन” ने भरी सभा में “द्रौपदी” को निर्वस्त्र करने के उद्देश्य से उसके “बदन” से “साड़ी” खींची थी…आपने तो ड्यूटी निभाने की खातिर मात्र “प्राइवेट पार्ट” में “डंडा” डालने का प्रयास भर किया है । देखें वायरल तस्वीर

 

यदि सोशल मीडिया पर वायरल यह तस्वीर “सही” है…तो इसे मत “निहारिये”…क्योंकि अभी और नीचे “गिरने” की संभावनाएं “भरपूर” हैं । अभी तो “गिरने” की शुरुआत भर है…इसलिए अपने “गिरने” की “सामर्थ्य” के “मनोबल” को “गिरने” मत दो ! सारा “विश्व” तुम्हारा “गिरना” देख रहा है…और ख़ुद न “गिर” पाने पर “अफ़सोस” भी जाहिर कर रहा है । इसलिए है पार्थ, अपने गिरने की “विश्वस्तरीय क्षमता” का “लोहा” मनवाए बगैर यदि तुम रूक गए…तो यह भारत वर्ष के “गौरवशाली” इतिहास में बेहद शर्म का विषय होकर दर्ज हो जाएगा ।  इसलिए रुकना मत…! क्योंकि अब तो तुम्हारा “गिरना” देखकर “विदेशी मीडिया” भी मैदान में “उतर” आया है ।

इसलिए “गिरो” पर अकेले मत “गिरो”…रुपए के साथ “गिरो”…चरित्र के साथ “गिरो”…गर्व के साथ “गिरो” क्योंकि एक तुम्हीं हो जिसमें “गिरने” का इतना अदम्य “साहस” है ! इसलिए अपने”साहस” के साथ “गिरो”…अपनी बेशर्मी के साथ “गिरो”…अपनी बेदर्दी के साथ “गिरो” क्योंकि दुनिया तुमसे “गिरना” सीख रही है । तुम पूरी भरपूरी से “गिरो” क्योंकि आनेवाली पीढ़ियां तुम्हारे “गिरने” में खुद के “गिरने” की संभावनाएं तलाशेंगी ! वे तुमसे भी ज़्यादा “गिरने” के “पराक्रम” पर “शोध” करेंगी ! इसलिए उनके “पराक्रम” पर यकीन करते हुए ज़रा और ज़ोर से “गिरो”…थोड़े शोर से “गिरो”…चहुँओर से “गिरो”…क्योंकि तुममें “गिरने” की “अद्भुत क्षमता” है

क्या जिम्मेदारों को प्रोटेस्ट की आहट पहले से नहीं थी ?

ये माना कि इस “प्रोटेस्ट” में विपक्षी पार्टियों के लोग भी थे…लेफ्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन भी थे और “कॉकरोचों” का “जमघट” भी था । मगर इन सबसे हटकर इस “प्रोटेस्ट” में भारी तादाद में ऐसे युवा भी शामिल थे…जो किसी भी पार्टी या संगठन के “काडर” नहीं हैं । जब बच्चो और नौजवानों की मेहनत का परिणाम “पेपर लीक” से मिलेगा…तो बच्चों की “निराशा” का अनुमान कोई “संवेदनशील सत्ता” ही लगा सकती है ! लेकिन यह तो “गिरे” लोग है…और इतने “गिरे” है कि पढते पढाते बच्चो को भी अपना “राजनैतिक शत्रु” मान बैठे हैं । ये कई “लाशें” गिरा देंगे लेकिन एक ऐसे “अकर्मण्य” और “नकारा” व्यक्ति की कुर्सी न गिरने पाए…जिसे बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं । जंतर मंतर किसी की “खाला” का घर तो है नही कि जहाँ उनके भांजे भांजिया हीं बैठ कर अपनी बात रख सकते थे । एक “लोकतांत्रिक व्यवस्था” में बच्चो ने एक भरी “व्यवस्था” से ऑंखें मिलाकर अपनी बात कहने का “साहस” क्या कर लिया…कि “व्यवस्था” का “अहंकार” दहकते “अंगारो” पर लोटने लगा ।

बस, हर जगह एक ही जवाब..पाकिस्तान एंगल !

अरे एक बार इन “मासूमों” की आँखों में झाँक कर देख तो लेते कि… क्या वाकई में कही कोई “साज़िश” नजर आती है ? जब देखो तब एक ही “राग”…”पाकिस्तान एंगल” ! नोएडा में “मजदूर” विरोध करें..तो “पाकिस्तान एंगल”…दिल्ली में “छात्र” विरोध करें तो “इस्लामाबाद एंगल”…कोई “कुंडली” खोल दे तो “आईएसआई एंगल”…कोई “हक” माँग ले तो उसे दो गज “जमीन” के नीचे सुला दो…कोई “भूख” का निवाला माँगे तो उसकी “जीभ” पर “कराची” चिपका दो । कोई “नंगे बदन” पर कपड़ा माँग ले तो… उसकी “नंगी देह” पर “लाहौर” खुदवा दो । मतलब इस दौर में हर सवाल का जवाब क्या “पाकिस्तान” है ? ये बच्चे किसी का “राजपाट” छीनने नही आये थे…ये एक “नकारे” जनप्रतिनिधि के खिलाफ अपनी बात कहने आये थे ! ये सिर्फ परीक्षाओं में भारी अव्यवस्था, करप्शन और लालफीताशाही का “हिसाब” लेने आए थे ! ये बढ़ती उम्र, घटती नौकरियों और छूटते अवसरों की तकलीफों का “सैलाब” लेकर आए थे ! ये जिम्मेदारी और जवाबदेही को भूल चुकी सरकार की “किताब” लेकर आए थे ! ये अपनी “आंख” की छटपटाहट में आपके “आंसू गैसों” के “गोलों” का “हिसाब” लेकर आए थे !

अरे इन बच्चों का न तो सरकार बनाने में कोई “इंट्रेस्ट” है और न गिराने में ! अरे बहुत से तो ऐसे हैं…जो अब “चुनाव” के नाम पर “नोटा” का बटन भी दबाने नहीं जाना चाहते । अरे मत मानते इनकी बात…लेकिन सुन तो लेते ! क्या UGC से लेकर NEET तक कराहती हुई शिक्षा व्यवस्था के मंत्री “अमर” हैं ? क्या छात्रों पर पड़ी हर “लाठी” उनके “अमरत्व” का सफर है ? अब आप “सोनम वांगचुक” से मिलने “मेदांता” जा रहे हैं…तो क्या पहले “जंतर मंतर” नहीं जा सकते थे ? जो आप “राहुल गांधी” से प्रधानमंत्री आवास पर धरना देने के बाद बातचीत की शुरुआत कर रहे हैं…क्या वो शुरुआत पहले नहीं कर सकते थे ? “कॉकरोच” वालों को अब आप “समय” दे रहे हैं…तो पहले क्या “ऊँची नाक” आड़े आ रही थी ? एक तरफ UGC से लेकर NEET तक उठ रहे सवाल “विफलताओं” का “शिखर” बन चुके हैं…तो दूसरी तरफ आपके “अभिनेता से नेता” बने लोग “नीट अखबार” लीक जैसा बयान देकर “अंतरराष्ट्रीय स्तर” पर सुर्खियाँ बटोर रहे हैं । इन सबके बावजूद आप इन जैसे “नगीनों” पर कोई भी फ़ैसला करने की “स्थिति” में नहीं हैं ।

राम मंदिर चन्दा चोरी प्रकरण राष्ट्रीय शर्म का विषय : जस्टिस अतुल श्रीधरन !

अब तो “राममंदिर” चढ़ावा चोरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के “जज” ने भी कह दिया है कि यह घटना भारतीय समाज के “नैतिक पतन” की पराकाष्ठा है । जस्टिस ने कहा हैं कि सरकार को कानून में बदलाव करना चाहिए ताकि “करप्शन” के आरोपियों को “मौत” की सजा दी जा सके । अब क्या परेशानी है ऐसी “सजा” निर्धारित करने में ? अब तो “हाइकोर्ट” ने भी कह दिया…! लेकिन नहीं, आप “भ्रष्टाचारियों” के लिए “मौत” की सजा का “प्रावधान” बना ही नहीं सकते…क्योंकि आपको तो “भ्रष्टाचार” और “भ्रष्टाचारियों” दोनो को “जिंदा” रखना है । हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने यह टिप्पणी तब की है…जब वे एक केस में “बुलडोजर एक्शन” पर सुनवाई कर रहे थे । अब तो “जस्टिस” अतुल श्रीधरन ने यहाँ तक कह दिया है कि “राममंदिर चढ़ावा चोरी” से भी अगर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता…तो उसे फिर किसी भी बात से “शर्म” नहीं आ सकती । न्यायमूर्ति ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि यह घटना “भारतीयों” की “नैतिकता” के सबसे निचले स्तर का “प्रतीक” है । मतलब दो चार “चोट्टों” की वजह से आज पूरे “भारतीयों” की “नैतिकता” और “आस्था” सवालों के घेरे में है ।

प्रोटेस्ट के बहाने सीओ साहब का धोबी पछाड़ दाँव !

इस “प्रोटेस्ट” के दौरान गोरखपुर से सीओ कोतवाली का वीडियो खूब वायरल हो रहा है । वीडियो तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी ने “अखिलेश यादव” की गिरफ्तारी को लेकर हो हल्ला मचाना शुरू कर दिया । मैं किसी “सपाई” की गलतियों को “जस्टिफाई” नहीं कर रहा हूँ सीओ साहब ! बल्कि इस वायरल वीडियो के बाद आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ ।

हमने माना सीओ साहब कि सपाइयों का सड़क जाम करना “कानूनन” उचित नहीं था…तो फिर क्या एक “दरगाही गुंडे” को “अभयदान” के “सुरक्षा कवच” में बैठाये रखना उचित है ? माना कि इन सपाइयों की कानफाड़ू आवाज आपके “चैन सुकून” को छीन रही थीं…तो क्या “धिक्कार” नामक बदमाश की गोलियों से ढेर हुए “बेगुनाह” की चीख़ें…आपके “दम” तोड़ चुके “जमीर” को कभी नहीं झकझोरती ? ये वायरल वीडियो देखकर माना कि आप “गर्दन” से पकड़कर सीधा “धोबी पछाड़” दाँव मारते हैं…लेकिन आपका ये “धोबी पछाड़” दाँव उस “डेढ़ पसली” के “दरगाही बदमाश” के सामने “साष्टांग दंडवत” की मुद्रा में क्यों आ जाता है ? ये माना कि किसी भी किस्म की “गुंडागर्दी” देखकर आपके “रगों” का खून “उबाल” मारने लग जाता है…तो फिर पुलिस की मौजूदगी में “दरगाही गुंडों” की “गुंडई” का वायरल वीडियो देखने के बाद भी…आपके “रगों” के उबलते “खून” पर “बर्फबारी” क्यों हो जाती है ? फर्क सिर्फ इतना है सीओ साहब…कि जब अपराध “गैरों” से होता है…तब आप “वर्दी” पहनकर “कानून” के “रक्षक” बन जाते हैं..और जब अपराध आपके “अपनों” से होता है…तब “अभयदान” की ख़ातिर आप उसी “वर्दी” को उतारकर “खूंटी” पर टाँग देते हैं । “कानून व्यवस्था” और “अपराध” पर ऐसी ही “दोहरी” मानसिकता…और ऐसे ही “पक्षपात” आक्रोश की “चिंगारी” को जन्म देते हैं ! यकीन न हो तो “गाँधी” को ट्रेन से “धकिया” कर  निकाल देने से लेकर…”मंगल पांडेय” तक का इतिहास खंगाल डालिये ! मन करे तो “जलियांवाला” बाग काण्ड से लेकर…”चौरीचौरा” के “अग्नि कांड” तक का “इतिहास” भी खंगाल डालिये…तब जाकर आपको समझ आएगा कि “जंतर मंतर प्रोटेस्ट” भी अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, पक्षपात और उत्पीड़न से उपजे “आक्रोश” का नतीजा है ।

By systemkasach

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