सिस्टम वेबसाइट मीडिया को मिला गुमनाम पुलिसकर्मी का गोपनीय पत्र ! कोतवाली के गलियारों से करोड़ों के खेल की गूंज !

गोरखपुर : आयरिश मूल के प्रसिद्ध राजनेता, दार्शनिक, लेखक और वक्ता “एडमंड बर्क” का कथन था कि “बुराई की जीत के लिए इतना ही पर्याप्त है…कि अच्छे लोग कुछ न करें”। आज “एडमंड बर्क” के इस “कथन” का प्रभाव गोरखपुर स्थित “कोतवाली” और “दरगाह” एंगल में भी साफ दिखाई पड़ रहा है । जानकार बताते हैं कि आम फरियादी की “दस्तक” पर कोतवाली के बंद दिलों के “दरवाज़े” खुलें या न खुलें…लेकिन कुछ “दरगाहियों” को “कुंडी” खड़काने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती ।  “कुंडी” छूते ही “गीत” बज उठता है कि…“कुंडी मत खड़काओ राजा… सीधा अंदर आओ राजा ।”

गुमनाम पत्र, गुमनाम पुलिसकर्मी और कोतवाली एंगल …

जब कोई व्यक्ति…जो स्वयं को “पुलिस” विभाग का कर्मचारी बताये और अपनी “जान” और “नौकरी” की सुरक्षा के भय से अपनी पहचान छिपाकर अपनी बात रखने के लिए किसी “मीडिया संस्थान” का चयन करे…तो उसका यह “चयन” निश्चित तौर पर उस मीडिया संस्थान की “विश्वसनीयता” का प्रमाण होता है । इसके बाद और इससे बढ़कर किसी “मीडिया संस्थान” की विश्वनीयता का कोई और “प्रमाण” नहीं हो सकता । ऐसा ही एक “गुमनाम” और “गोपनीय पत्र” जरिये स्पीड पोस्ट “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” तक पहुँचा है…जिसने कई गंभीर “प्रश्न” खड़े किए हैं । पत्र लिखने वाले कथित “पुलिसकर्मी” ने अनुरोध किया है कि इस प्रकरण को “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” अपने स्तर से पड़ताल कर इसे प्रमुखता से “प्रकाशित” करे…ताकि एसएसपी महोदय तक इस “महाघोटाले” की जानकारी पहुँचे…और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जा सके । यदि यह “गुमनाम” पत्र वाकई में किसी पुलिसकर्मी की ओर से “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को भेजा गया है…तो यह पत्र “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले उन “विशुद्ध दलालों” और “दरगाही गुंडों” के मुँह पर जोरदार “तमाचा” है…जो कुछ दिन पहले तक फेसबुक पर “राग” अलाप रहे थे कि…तेरे सारे “मुखबिर” चिन्हित हैं ।

वर्तमान स्थिति में हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को प्राप्त हुआ यह “पत्र” एक “गुमनाम” पत्र है । इसलिए इसमें लगाए गए आरोपों का “स्वतंत्र सत्यापन” अभी शेष है । प्रकरण में जाँच का अधिकार “सक्षम अधिकारी” को प्राप्त है…इसलिए नीचे लिखे गए सभी बिंदु मात्र उस “गुमनाम” पत्र के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं…जो पत्र में लगाये गए दावों के निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहे हैं । दूसरी तरफ इस बात की भी प्रबल संभावना है कि कथित “गुमनाम” पत्र “दरगाही गैंग” के “शैतानी खोपड़ी” की उपज हो…क्योंकि यह गैंग “मक्कारी” और “फरेब” का एक ऐसा जीता जागता उदाहरण है…जिनके खिलाफ दिल्ली पुलिस की “जीडी” और “मुहर” की कूटरचना किये जाने और तमाम लोगों के खिलाफ “फर्जी” मुकदमे दर्ज कराने के अब तक कई “प्रमाण” सामने आ चुके हैं ।

बहरहाल, वजह चाहे जो भी हो…लेकिन एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि…”सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को प्राप्त हुई इस “गुमनाम” चिट्ठी ने अपने आरोपों और दावों की “रिमोट” से…”कोतवाली” सर्कल पुलिस के “कारनामों” का “प्रचंड नर्तन” करता हुआ “लहँगा” उठा दिया है । “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने तो “कोतवाली सर्कल” के बंद होते “भाग्य” दरवाजों की “चरमराहट” को उसी वक्त “महसूस” कर लिया था…जब “दरगाही गुंडों” के इशारे पर “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को फर्जी मुक़दमें में घसीटने की कोशिशें की गई थीं ।

कथित पुलिसकर्मी के गुमनाम पत्र में गंभीर आरोप…

फर्जी वारिस का दावा….पत्र के अनुसार मुख्यमंत्री की ड्रीम परियोजना “विरासत गलियारा” से जुड़े भूमि प्रकरण में कथित रूप से वास्तविक “उत्तराधिकार” की प्रक्रिया को नियमतः बगैर पूरी किये एक व्यक्ति को “वारिस” के रूप में प्रस्तुत कर “भूमाफिया” इक़रार अहमद को 2 करोड़ की जमीन “गिफ्ट डीड” कराई गई ।

राजस्व प्रक्रिया को दरकिनार करने का आरोप…पत्र में दावा किया गया है कि “राजस्व अभिलेखों” में मूल “खातेदारों” के नाम दर्ज होने और “उत्तराधिकार” लंबित होने के बावजूद कथित रूप से कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी की गई ।

सीओ कोतवाली पर मिलीभगत का आरोप…पत्र के अनुसार “सीओ कोतवाली” और “हल्का लेखपाल” के विषय मे लिखा गया है कि उनके द्वारा कथित रूप से आवश्यक राजस्व जाँच, रिपोर्ट और वैधानिक प्रक्रिया को “दरकिनार” कर विवादित कार्रवाई को “भूमाफिया” इक़रार अहमद के पक्ष में आगे बढ़ाया गया है ।

सरकारी अभिलेखों और साक्ष्यों से छेड़छाड़ का दावा… आरोप लगाया गया है कि भविष्य में कानूनी कार्रवाई से बचने तथा “साक्ष्य” कमजोर करने के उद्देश्य से “सीओ कोतवाली” द्वारा “सरकारी रिकॉर्ड” एवं “मालखाने” से जुड़े “अभिलेखों” को पुलिस क्वार्टर “डेमोलिश” कराने की आड़ में  गायब करा दिया गया है ।

क्वार्टर खाली कराने के लिए महिला दरोगा को जमीन की रजिस्ट्री…पत्र में यह आरोप भी लगाया गया है कि जब “कोतवाली” स्थित “सरकारी क्वार्टर” को कथित “महिला दरोगा” तथा उनके “दीवान पति” द्वारा खाली करने से इंकार कर दिया गया…तब “भूमाफिया” इक़रार अहमद ने इन्हें “राजी” करने के लिए “महिला दरोगा” की माँ (सास) के नाम “बेनामी रजिस्ट्री” करायी और “क्वार्टर” खाली करने के लिए उन्हें “रजामंद” किया । पत्र में यह भी बताया गया है कि पति पत्नी “दरोगा” और “दीवान” फिलहाल थाना “कोतवाली” और “कैंट” में तैनात हैं ।

सिस्टम वेबसाइट मीडिया से विशेष अनुरोध… पत्र में “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” से विशेष अनुरोध किया गया है कि “खोजी पत्रकारिता” के जरिये इस पूरे “घोटाले” का खुलासा करें…ताकि एसएसपी महोदय द्वारा इस मामले में संलिप्त “भूमाफिया” समेत लेखपाल और पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही की जा सके । पत्र देखने के लिए क्लिक करें  ➡️…गुमनाम पत्र PDF

फ्रांस के प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक, लेखक और सांसद “फ़्रेडरिक बास्तिया” का कथन है कि “जब लूट ही जीवन का तरीका बन जाए…तो लोग उसे वैध ठहराने वाली व्यवस्था भी बना लेते हैं।” तो क्या वाकई में गोरखपुर की “कोतवाली सर्कल” पुलिस “लूट” करने और “लूट” को वैध ठहराने वाली “व्यवस्था” की “जनक” बन चुकी है ? कहा जाता है कि “लोकतंत्र” में सबसे “खतरनाक” अपराधी वह नहीं होता जो “कानून” तोड़ता है…बल्कि वह होता है जो “कानून” की शक्ति का उपयोग “अपराध” को बचाने में करता है । तो क्या “कानून” की शक्ति का दुरुपयोग कर यही सब “अपराध” हो रहा है “कोतवाली सर्कल” में ? अरे इस “गुमनाम पत्र” की बात छोड़िए…और सिर्फ “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” द्वारा हासिल किए गए “सबूतों” की रोशनी में अगर एक बार “सीओ साहब” की जाँच करा लीजिए…तो “वर्दी” की आड़ में खेले गए “खेल” का “बुखार” इक़रार मोह के “थर्मामीटर” में 104 डिग्री के पार “नज़र” आएगा । सिर्फ एक बार “कोतवाली सर्कल” के “सेनापति” का “इकोसिस्टम” खंगाल कर देखिए…तो इस सवाल का जवाब जरूर मिल जाएगा कि सारे नियम कानून की “नदियाँ” आखिर “दरगाह” के “नाले” में ही जाकर “ग़ोता” क्यों मारती हैं ?

गुमनाम पत्र की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई…

बहरहाल, इस “गुमनाम पत्र” की जानकारी “प्रमुख सचिव गृह” तथा “डीजीपी उत्तरप्रदेश” समेत “एसएसपी गोरखपुर” के ऑफिसियल ईमेल आईडी पर दे दी गयी है ।

दो दिन की छानबीन में क्या क्या मिले सुराग…

दो दिन पहले “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को प्राप्त हुए “गुमनाम पत्र” की छानबीन के दौरान अब तक इतना तो पता चल चुका है कि कथित “गुमनाम पत्र” जैतपुर “पोस्ट आफिस” से भेजा गया है । यह भी पता चल चुका है कि “अवैध फंडिंग” का तानाबाना बुनने वाले “भूमाफिया” इक़रार का हिसाबी किताबी “चित्रगुप्त”… कोई और नहीं बल्कि एक ऐसा “शिक्षक” है जो शिक्षक जैसी मामूली नौकरी की आड़ में भी “अरबों” का “साम्राज्य” खड़ा किये बैठा है । ये वही शिक्षक है, जिसे कुछ वर्षों पहले “प्रिंट मीडिया” के एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपनी ख़बरों में संदिग्ध गतिविधियों का “एजेंट” बताया था । सके अतिरिक्त यह जानकारी भी सही है कि आनन फानन में “रजिस्ट्री” होते ही “कोतवाली” स्थित “पुलिस क्वार्टर” को ढहाया जा चुका है…और इक़रार अहमद को “गिफ्ट” में मिले “दो करोड़” के जमीन की “रजिस्ट्री” की सूचना वाकई में सही है । रजिस्ट्री के “कागजात” हम तक पहुँच चुके हैं । कागजात देखने के लिए क्लिक करें ➡️ रजिस्ट्री कागजात PDF

दो करोड़ की जमीन भूमाफिया को मिली बिल्कुल मुफ्त…

इस रजिस्ट्री की सबसे हैरतअंगेज चर्चा इस बात की है कि लगभग “दो करोड़” की यह जमीन “भूमाफिया” इक़रार अहमद को बिल्कुल मुफ्त (गिफ्ट डीड) के तहत “दान” में मिली है । यदि हिन्दू रीति में “दान” करना हो तो सरकारी “बंदिशें” हैं कि आप सिर्फ अपने “रक्त संबंधी” को ही “दान” कर सकते हैं । परंतु मुस्लिम समुदाय में “हिब्बा” (दान) के लिए कोई “रक्त संबंधी” जैसी “बंदिशें” नहीं हैं । यह भी सत्य है कि जिस व्यक्ति ने “भूमाफिया” इक़रार को यह जमीन “दान” की है…उसे अकेले यह निर्णय लेने का अधिकार बिल्कुल भी नहीं था । इस “जमीन” पर इक़रार अहमद द्वारा लगभग 14 लाख का “स्टाम्प शुल्क” अदा किया गया है । सबसे हैरतअंगेज बात तो यह है कि…पिछले कई सालों से यह जमीन खाली इसलिए नहीं हुई…क्योंकि इस “जमीन” पर “पुलिस क्वार्टर” बने हुए थे ! लेकिन जैसे ही यह जमीन मुफ्त में “भूमाफिया” इक़रार अहमद को मिलती है…वैसे ही उस “जमीन” पर बने “पुलिस क्वार्टर” से “पुलिसकर्मियों” को आनन फानन में हटाकर “सरकारी क्वार्टर” को “जमींदोज” करते हुए जमीन खाली करा ली गयी है ।

कोतवाली के कलम की धनुष पर झूठी रिपोर्ट की प्रत्यंचा..

तो क्या “गुमनाम पत्र” में “सीओ कोतवाली” और “हल्का लेखपाल” समेत कुछ “पुलिसकर्मियों” के विषय में “मिलीभगत” की लिखी गयी बातें “सच” हैं ? क्या वाकई में “करोड़ो” की इस “डील” औऱ “खेल” में “सीओ कोतवाली साहब” का भी कोई “हिस्सा” है ? क्या ये “सच” है कि कोतवाली सर्कल “पुलिस” की “गोद” में बैठकर आकंठ भ्रष्टाचार…”श्रीकृष्ण” दौर के “कालिया नाग” जैसा “फुँफकार” रहा है ? क्या खुद योगी आदित्यनाथ के “शहर” में “दरगाह” की आड़ में “अपराध” और “करप्शन” का “दानव” रक्तबीज की तरह “चिंघाड़” रहा है ? जिस मुख्यमंत्री के राज्य में “दरगाह” और “मदरसों’ की ईंट तक खंगाल दी जा रही है…फिर उसी “राज्य” सीएम के गृह जनपद में “दरगाह” की आड़ में “अय्याशी” और “अवैध मदरसों” का प्रचंड “दावानल” “दैत्य भस्मासुर” बनकर आखिर किसके संरक्षण में “हुँकार” रहा है ? लेकिन कोतवाली सर्कल के “सेनापति” साहब हैं…जो हर बार “बदमाश इक़रार” को बचाने के लिए अपनी “कलम” के “धनुष” पर “झूठी रिपोर्ट” की “प्रत्यंचा” चढ़ा देते हैं । अब ऐसे तमाम “तथ्य” सार्वजनिक हो चुके हैं जो बता रहे हैं कि…कोतवाली सर्कल ने “दरगाह” की आड़ में “इक़रार” नाम के “फोड़े” को जानबूझकर इसलिए “पकने” दिया… ताकि “जड़ों” तक “जख़्म” देने वाला “नासूर” तैयार हो सके । “दरगाहियों” के छिपे हुए संरक्षक और “प्रेस क्लब” में “लाला और हलाला” जैसी “फॉर्मूले” के “जनक” कहे जाने वाले “मंत्री जी” को शायद यह अहसास हो चुका है…कि जब आपको “सर्व शक्तिशाली” होने का “भरम” हो जाता है…तब ठीक उसी वक्त “नियति” की “अंतिम चोट” का लोहा भी “गरम” हो जाता है ।

हमारी कहानी के काल्पनिक चरित्र डफर मियाँ को मशविरा..

हमारी कहानी के काल्पनिक चरित्र “डफर मियाँ” बेवजह और बगैर किसी तथ्य के अपना “बनैले भैंसे” जैसा “मुँह” हर जगह घुसाने की “वाहियात” आदत से परेशान हैं । यही कारण है कि इनके जीवन “उपन्यास” के कुछ “मस्तराम किस्से” अब सार्वजनिक पटल पर आ गए हैं । इन “मस्तराम किस्सों” को उकेड़ने की बजाय एक “सच्चे हितैषी” की तरह मैं बार बार इन्हें समझा कर थक चुका हूँ कि…”अय्याशियों” से “तौबा” कर लो ! तुम भी समझो और अपने आका “धिक्कार मियाँ” को भी समझाओ…कि ये “इराक” और “पाकिस्तान” नहीं, बल्कि “हिंदुस्तान” है । यहाँ सारे सम्बंध “सभ्यता” और “संस्कृति” के दायरे में बनते हैं…न कि तुम्हारे जैसे ! जब मन में आये तो “आपा” को “रेल” दो…जब “जी” करे तो “बाज़ी” की “ठेल” दो…जब “हुड़क” लगे तो “खाला” की “खोल” दो…जब “जिद्द” आये तो “अम्मी” की “धकेल” दो…और जब कोई न मिले तो “बकरी मुर्गी” में ही “उड़ेल” दो…! अब ऐसी ही हरकतें रहेंगी…तो कल को क्या “कन्फ्यूजन” नहीं रहेगा कि “अब्बा” कौन थे…? मैं जानता हूँ कि “डफर मियाँ” पर हमारे समझाने का कोई असर नहीं होगा ! पोस्ट पढ़ते ही ये उल्टा फिर से AI निर्मित पोस्टर बनाएंगे…और उस पर “अब्बा” का नाम लिखते हुए उनका “फोटो” चस्पा कर “रायता” फैलाना शुरू कर देंगे…!

By systemkasach

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