गोरखपुर जिला अस्पताल में डॉक्टर पर हमला…और पूरी व्यवस्था कटघरे में !

गोरखपुर : उम्मीद है कि जिला अस्पताल के “ठाकुर साहब” को जाँच के “फंदे” से “राहत” मिल गयी होगी…औऱ उम्मीद यह भी है कि “भविष्य” में अब “ठाकुर साहब” अपनी “बुद्धि विवेक” के अनुसार उचित अनुचित देखते हुए ही काम करेंगे । उम्मीद यह भी है कि “जिला अस्पताल” गोरखपुर में “डिप्टी सीएम” साहब के निर्देश के बाद “एसी” लग गया होगा…”इमरजेंसी वार्ड” की हवा भी “ठंडी” हो गई होगी…लेकिन उन “गुंडों” का क्या…जिन्होंने अभी कल “डॉक्टर चैम्बर” में डॉक्टर पर ही हमला कर “माहौल” को “गर्म” कर दिया है ।

पिछली बार जब उत्तर प्रदेश के “उप मुख्यमंत्री” का “जिला अस्पताल” गोरखपुर नें दौरा हुआ था…तब “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने एक सीधा सा “सवाल” उठाया था कि “इमरजेंसी वार्ड” में “एसी” लगाना अच्छी बात है… लेकिन जिला अस्पताल में वर्षों से व्याप्त “आकंठ भ्रष्टाचार” गुंडागर्दी और “भय” के माहौल पर लगाम कौन लगाएगा ? हमने यह भी पूछा था कि आखिर 26 वर्षों से एक ही अस्पताल में जमे “डॉक्टरों” और “लैब टेक्नीशियनों” की जवाबदेही कब तय होगी ? अब तक इस सवाल का जवाब “फाइलों” में ही दबा हुआ है । और शायद यही वजह है कि बार बार लखनऊ मुख्यालय से “पत्र” मिलने के बाद भी “AD साहब” बरसात बीतने की “आस” में “घोंघा बसन्त” बने बैठे हैं ।

नेत्र चिकित्सक पर चेम्बर में हमला…और चारों तरफ सन्नाटा

जिला अस्पताल गोरखपुर में कल हुई एक घटना ने “अराजकता” का जीवंत “उदाहरण” प्रस्तुत करते हुए जिला अस्पताल के पूरे “सिस्टम” का चेहरा सबके सामने ला दिया है । जिला अस्पताल में कार्यरत “नेत्र शल्य चिकित्सक” अंजनी गुप्ता के साथ उनके “चैम्बर” में घुसकर मारपीट की गई है । डॉक्टर के “सहकर्मी” ने बताया है कि “ड्राइविंग लाइसेंस” से जुड़ी एक प्रक्रिया में “हस्ताक्षर” कराने पहुंचे एक मनबढ़ व्यक्ति को “नेत्र सर्जन” डॉ. अंजनी गुप्ता ने किसी कारणवश “हस्ताक्षर” करने से मना कर दिया । इसके बाद उस व्यक्ति ने डॉक्टर पर “हमला” कर दिया…”स्टूल” उठाकर मारने का प्रयास भी किया गया…और बीच-बचाव के बाद डॉक्टर को अभद्र “गालियों” से नवाजा गया । सुने डॉक्टर गुप्ता से हुई टेलिफ़ोनिक बातचीत…

 

घटना सीसीटीवी में कैद होने के दावे…

पूरी घटना “सीसीटीवी” में रिकॉर्ड होने के “दावे” किए जा रहे हैं… लेकिन इन “दावों” के इतर जिला अस्पताल के SIC साहब “मरघट” जैसे सन्नाटे की “तस्वीर” खींचें बैठे हैं । कई बार फोन करने और “मैसेज” देने के बाद भी कोई जवाब नहीं है साहब के पास ! आखिर ये “सीसीटीवी” कब काम आएगा “SIC साहब” ? क्या जब “डॉक्टर” की जान चली जाएगी ? या फिर इस “सीसीटीवी” को आपके अपनों के “कर्मकांडों” को “कैप्चर” करने की “इजाजत” नहीं दी गई है । वास्तविकता तो यह है कि “जिला अस्पताल” की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ “भाषणों” तक सीमित है । “सुरक्षा” की बात करो तो 26 साल से जमे डॉक्टर सुमन औऱ SIC साहब के दावे “सुरक्षा” मामले में अग्रणी माने जाने वाले “CIA” और “मोसाद” को भी पीछे छोड़ देते हैं । लेकिन जब एक बाहरी व्यक्ति “डॉक्टर” के “चेम्बर” तक पहुँचकर डॉक्टर पर “हमला” कर देता है…तब उसी “सुरक्षा व्यवस्था” पर इनके “मुँह” में “दही” जम जाता है ।

डर और आकंठ भ्रष्टाचार की गिरफ्त में जिला अस्पताल !

घटना से बुरी तरह डरी हुई डॉक्टर गुप्ता की पत्नी ने “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को फोन कर बताया है कि घटना के बाद उनका परिवार “भय” में है । उन्होंने यह भी बताया है कि कई महीनों से “वेतन” रोककर “डॉक्टर गुप्ता” को बेवजह परेशान किया जा रहा है । खराब “ACR” लिखने की धमकियां दी जाती हैं…जिस कारण “डॉक्टर गुप्ता” मानसिक दबाव में चल रहे हैं । इतना सब कुछ कम था जो चैम्बर में घुसकर “हमला” भी कर दिया गया । आखिर “जिला अस्पताल गोरखपुर” की “गोद” में बह रही “उत्पीड़न गाथा” की इस अथाह “कर्मनाशा” को कौन देखेगा “डिप्टी सीएम साहब” ? यह केवल एक “डॉक्टर” का मामला नहीं है…बल्कि पूरे “जिला अस्पताल” पर पसरे “अमावस” की “काली रात” जैसा एक “वीभत्स” सन्नाटा है ! यह सिर्फ एक “सवाल” नहीं है…बल्कि पूरे “जिला अस्पताल” के समूचे “अराजक तंत्र” पर एक गंभीर “प्रश्नचिह्न” है । डॉक्टर गुप्ता की “पत्नी” ने जो “उत्पीड़न गाथा” बताई है…उसे यहाँ पूरा सुना पाना तो “संभव” नहीं है SIC साहब…लेकिन आपको उसका कुछ “अंश” जरूर सुनना चाहिए । सुने डॉक्टर गुप्ता की पत्नी क्या कह रही हैं ?

सुना SIC साहब…डॉक्टर गुप्ता और उनकी पत्नी की “आवाज” में छिपे “आंसूओं” की धार क्या कह रही हैं ? इतनी “दुर्व्यवस्था” और “नकारेपन” के बावजूद भी आप…“मैं तुलसी तेरे आंगन की” जैसी शक्ल बनाये हुए…पूरा टाइम “नजरें” झुकाए “जिला अस्पताल” में आखिर कैसे बैठे रहते हैं ? “धन” और “सौंदर्य” के पीछे “भ्रमर” की तरह “बाँवरे” होकर नाचने वाले अपने 26 वर्षीय डॉक्टर सुमन, शेष चौधरी और फार्मासिस्ट अजय सिंह को आखिर आप किस “घोर तपस्या” का “अभयदान” दिए बैठे हैं ? अरे सिर्फ एक बार अपने “जमीर” को “माया” के बंधन से “मुक्त” करके तो देखिए …”सत्य” का “हैरतअंगेज़” पोस्टर “बुक्का” फाड़कर सामने आ जाएगा ।

सबसे बड़ा सवाल…कौन है हमलावर ?

हमला करने वाला “शख्स” वही है…जो पिछले 26 सालों से जिला अस्पताल में जमे डॉक्टर “वी के सुमन” के ससुराल पक्ष से अपना “रिश्ता” बताता रहा है । महिला जिला चिकित्सालय गोरखपुर से “सेवानिवृत्त” हो चुके इस “शख़्स” के बारे में यह चर्चा आम है कि अभी तक “जिला अस्पताल” के “ठेके पट्टों” से लेकर अन्य मामलातों में इसका “बदस्तूर” दखल रहता है । “तथ्य” और “सबूत” बताते हैं कि पिछली कई मारपीट की “घटनाओं” में हुए तमाम शिकायतें भ्रष्टाचार और सुलह की “जड़” में इस शख्स के खिलाफ बहुत से मामले और “सुबूत” आते रहे…और डॉक्टर सुमन भी अपने इस रिश्ते को भरपूर तरीके से “भुनाते” रहे हैं । हालात तो यह हैं कि एक बाहरी व्यक्ति “डॉक्टर” चेम्बर में घुसकर “डॉक्टर” पर हमला कर देता है…और SIC साहब कुछ एक्शन लेने की बजाय “सन्नाटे की चादर” खींच लेते हैं । क्या इसलिए…कि “डॉक्टर” पर हमलावर होने वाला यह शख्स अपने रिटायरमेन्ट के बाद भी आपके “जिला अस्पताल” से लेकर आपके चैम्बर में बैठ कर “भूँजा” खाता रहता है ? सबूत चाहिए तो बताइएगा “SIC साहब”..क्योंकि यहाँ बिना “सबूत” के कुछ नहीं लिखा जाता !

SIC साहब की रहस्यमयी चुप्पी !

आपको बताना चाहिए SIC साहब कि “डॉक्टर गुप्ता” पर हमला करने वाले के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई ? “सीसीटीवी” फुटेज सुरक्षित है या उसे भी “भूँजे” के साथ “चटनी” समझकर “चाट” लिया गया ? आप जिला अस्पताल की “दुर्व्यवस्था” पर जिस तरह से चुप्पी की “चादर” ओढ़े हैं…वो “कायरता” भरी चुप्पी तो “महाभारत काल” के “भीष्म पितामह” को भी “मात” दे रही है । अगर आपसे स्थिति नहीं संभलती तो छोड़ क्यों नहीं देते “कुर्सी” का मोह ? जरूरी तो नहीं कि “अकर्मण्य” होने के बावजूद भी आप “धृतराष्ट्र” की तरह “कुर्सी मोह” से जकड़े रहें ! आपके चुप्पी के खिलाफ अब तो “फार्मासिस्ट संघ” ने भी “मोर्चा” खोल दिया है

 

आपके अतिप्रिय मोस्ट जूनियर “फार्मासिस्ट” अजय सिंह “मेडिकल स्टोर प्रभार” से लेकर “भोजन और मेडिकल गैस” जैसे 8 प्रकार के “प्रभार” की लगाम अपने हाथ मे लिए बैठे हैं…और आप शासनादेश के बावजूद इस “फार्मासिस्ट” के “पटल” परिवर्तन पर “आँखें” मूँदे बैठे हैं । क्या जिम्मेदारी और कर्तव्य आपके लिए “बेसन” में लपेटे गए उस “प्याज़” के “पकौड़ी” जैसी हो गई है…जिसे आप इस “बरसात” में अपने “दाँतों” तले चबा चबाकर “खाते” चले जा रहे हैं ? याद रखिये SIC साहब…कि जब आप सालों साल तक अनगिनत निर्दोष,पीड़ित और बेगुनाह सताए हुए लोगों की “तकलीफ़” पर “अनैतिकता” की अति का “महल” खड़ा करते हैं…तो एक न एक रोज इस “महल” के “नींव” की ईंटें नीचे से “दरक” जाती हैं ।

By systemkasach

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