गोरखपुर : वार्ड नंबर 17 की जनता ने सिर्फ इतना ही तो पूछा था कि “सड़क” और “स्ट्रीट लाइट” कब मिलेगी ? लेकिन बताया जा रहा है कि “सवाल” पूछते ही…जैसे कथित “भूमाफियाओं” और “नेताजी” के “एसी” कमरों का “तापमान” अचानक से बढ़ गया । वार्ड नंबर 17 की “जनता” ने जैसे ही सड़क, नाली और पथ प्रकाश की मामूली सी माँग क्या रख दी… नेताजी के “कान” खड़े हो गए ! नाराज हो गए कि आखिर “जनता” ने सड़क माँगने की “जुर्रत” कैसे कर दी ? एक “घूँट” में “हलक” तर किया और धारा प्रवाह “गरियाते” हुए बोले… ई “सब उ ससुरा पत्रकरवा” का किया धरा है । “ठेकेदारों” के “प्लाटिंग” की दुकानें खतरे में दिखने लगीं…तो देर रात तक “बैठकों” के साथ “साजिशों” का भी दौर चला । दिमाग के “जंग लगे घोड़े” दौड़ाए गए…और अंततः “ईस्ट इंडिया कंपनी” का वही सदियों पुराना अचूक “फॉर्मूला” बाहर निकाला गया…”फूट डालो और राज करो” !
डिवाइड एंड रूल का पैंतरा !
फॉर्मूले के तहत आखिरकार वही “रणनीति” सामने आई..और तय हुआ कि जब “जनता” एकजुट होकर सवाल पूछे…तो “जनता” को ही दो हिस्सों में बाँट दो ! यानी “अंग्रेजों” का आजमाया हुआ पुराना फार्मूला “डिवाइड एंड रूल” ! खाका तैयार हुआ कि “सड़क” की माँग उठाने वाले “शर्मा कॉलोनी” और कथित “पत्रकार कॉलोनी” के बीच दरार पैदा की जाए । एक कॉलोनी में “सड़क” निर्माण “शुरू” कर दो…और दूसरे को “लटका” दो !
नेता जी ने किया जनसंपर्क !
अपने “रणनीति” की पहली कड़ी में नेताजी “शर्मा कॉलोनी” के “भ्रमण” पर निकल पड़े । घर घर जाकर “फूट के बीज” बोने का भरपूर “स्वांग” रचा गया । सरकारी खजाने की “लूट” और भूमाफियाओं की “साठगांठ” उजागर करने वाले “पत्रकार” को इसलिए जी भरकर कोसा गया…क्योंकि पत्रकार ने “नेताजी” के शांतिपूर्ण “विकास” में “खलल” डाल दिया था । “प्लॉटिंग” करने वालों और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े सवालों को सार्वजनिक करने की हिम्मत दिखाने वाले उस पत्रकार पर जमकर “भड़ास” निकाली गई । एक “डॉक्टर” की तरह “जनता” को “सलाह” दी गई कि आपलोग इन “चक्करों” में न पड़िये । मगर अफसोस ! जनता की समझदारी के आगे नेताजी की “डिवाइड एंड रूल” वाली फुसफुसी “मिसाइल” “फुस्स” हो गई…और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा ।
नया पैंतरा : शर्मा कालोनी में दस्तक…पत्रकार कालोनी से दूरी
अपनी “रणनीति” के अनुसार नेताजी ने “शर्मा कालोनी” तक घर घर जाकर “दस्तक” दी…लेकिन अपनी “प्लानिंग” के अनुसार कथित “पत्रकार कालोनी” से दूरी बनाये रखी । आज भी सबसे बड़ा वही सवाल अपनी जगह मुँह बाए खड़ा है नेताजी…कि जहाँ एक तरफ वर्षों से “आबादी” के लोग सड़क, नाली और रोशनी के लिए तरस रहे है…वहीं दूसरी तरफ “आबादी” से दूर नई-नई “प्लॉटिंग” तक सरकारी सुविधाएँ पहुँचाने की इतनी जल्दी क्यों दिखाई गई ? सूत्रों की मानें तो नेताजी का अगला कदम “फूट डालो और राज करो” वाली रणनीति पर शुरू हो सकता है । संभावना है कि किसी एक “कॉलोनी” में काम शुरू कराया जाएगा और दूसरी को…“जल्द होगा”…”विचाराधीन है”…”प्रस्ताव भेज दिया गया है”…जैसा “झुनझुना” पकड़ाने की कोशिश की जाएगी । लेकिन नेताजी…इस बार वाला मामला थोड़ा अलग है । आप “डाल डाल” चलेंगे तो जनता “पात पात” चलेगी ।
कुर्सी नहीं, सड़क मांगी थी…फिर सवाल पूछने वाले पत्रकार को कोसने क्यों लगे नेता जी ?
नेताजी आखिरकार पत्रकार को कोसते हुए “शर्मा कालोनी” क्यों पहुँच गए थे ? और पहुँच ही गए थे…तो चार कदम बगल में भी आ जाते…”पत्रकार” से भी मुलाकात हो जाती…और जितना “मन” करता…सामने ही “कोस लेते ! अरे नेताजी…पत्रकार ने अपने “मोहल्ले” के लिए…और आपके झूठे वादों से ठगे गए हिन्दू बाहुल्य “शर्मा कालोनी” के लिए “सड़क” माँगी थी…आपकी “कुर्सी” नहीं ? पत्रकार ने “जनता” के लिए और अपने “मोहल्ले” के विकास के लिए सवाल पूछा था…आपके “निजी संपत्ति” का ब्यौरा और कथित “भूमाफियाओं” की कृपा से आपको प्राप्त हुए धुआँधार “डोनेशन” का हिसाब नहीं माँगा था ? इसलिए कोई भी “पैंतरा” खेलने से बेहतर है नेताजी…कि “सड़क” बनवाइये… और रूठी हुई “जनता” को फिर से गले लगाइए । सवाल पूछने वाले पत्रकार को “कोसने” की बजाय सवालों के “जवाब” दीजिए । कहीं ऐसा न हो कि “सड़क” और “लाइट” के छोटे से सवाल से शुरू हुई “कहानी” आगे चलकर…”प्लॉटिंग” से लेकर “ठेकेदारी” तक…”ठेकेदारी” से लेकर निर्माण की “गुणवत्ता” तक…”निर्माण” से लेकर “भुगतान” तक…और “भुगतान” से लेकर पूरे कथित “भूमाफिया” विकास मॉडल की जाँच तक पहुँच जाए ! कहीं ऐसा न हो कि “गोरखपुर विकास प्राधिकरण” को बीच में आकर यह कहना पड़े कि जहाँ तक “आरसीसी” सड़क पहुँचायी गयी…वो “प्लाटिंग” ही अवैध है ! कहीं ऐसा न हो कि “रेरा” को बीच में आकर कहना पड़े की “प्लाटिंग” करने वाले और की गई “प्लाटिंग” दोनो ही अवैध है ! हो सकता है कि “प्लाटिंग” के नीचे कोई “तालाब” “कुँवा” या “पोखरा” निकल जाए ! हो सकता है कि कथित “भूमाफियाओं” द्वारा “बेनामी संपत्ति” से कमाई गयी अकूत “दौलत” का हिसाब माँगने “केंद्रीय एजेंसियों” को पादरी बाजार में “दस्तक” देनी पड़ जाए…और फिर जाँच की ऐसी “विस्तृत श्रृंखला” खुले कि…वार्ड नंबर 17 का नाम “सड़क” के लिए नहीं…बल्कि “विकास” के अनोखे “मॉडल” के लिए पूरे “प्रदेश” में मशहूर हो जाए ! देखें वीडियो 👇🏽
नेताजी के पैंतरे के जवाब में जनता का जवाब !
कहते हैं कि “कब्र” को जितना खोदेंगे…”बदबू” उतनी ही बढ़ती जाएगी । आपके “बाँटो और राज करो” के “पैंतरे” के जवाब में एक तरफ “जनता” ने पिछले तीन वर्षों में वार्ड नंबर 17 में कराए गए निर्माण एवं विकास कार्यों का विस्तृत विवरण “जनसूचना अधिकार अधिनियम, 2005” के तहत माँग लिया है…तो दूसरी तरफ “पत्रकरवा” को कोसने का नतीजा यह है कि “पत्रकरवा” ने भी “RTI चालीसा” लिखकर वार्ड नंबर 17 से जुड़े “चित्रगुप्तों” की पूरी “कुंडली” माँग ली है…साथ ही इन “जनसूचनाओं” के पल पल की प्रगति जाँचने के लिए “सूचना आयोग” लखनऊ के पैरविकारों को भी “अलर्ट” मोड पर डाल दिया है । अब सामने आएगा कि कहाँ “सड़क” बनी ? कहाँ “नाली” बनी ? कहाँ “लाइट” लगी ? कितना “बजट” आया ? कितना “खर्च” हुआ ? किस “ठेकेदार” को काम मिला ? किसे “भुगतान” हुआ ? किस “भूमाफिया” का हित साधने के लिए कितना “सरकारी बजट” लुटाया गया और “जमीन” पर वास्तव में कितना “काम” हुआ ?
शायद ये पहला “वार्ड” है…जिसके “विकास” से “गदगद” और “खुशहाल” जनता ने एक साथ पाँच पाँच “RTI” चेंप दिया है ।
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